तुम्हारा ख़ुद रूठ जाना औरफिर मुझको मनाना ,
खिलखिला कर हँसना, फिर चुपके से मुस्कुराना
जब मैं रूठ जाऊं तो .............मनाना, मनाना, मनाते ही जाना ।
वोह हौले से आना......... ..और आकर दीवार पर टिक जाना।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
वो धीरे से पीठ पर धौल ज़माना ।
पकाते पकाते भजन गुनगुनाना ।
तुम्हारा वो सँझा में तुलसा पर दीये जलाना।
वो बाहर से हँसना भीतर से रोना ।
मेरे लिए दूसरों के ताने सहना ।
कुछ पूछने पर चुपके से मुस्कुराना ।
आँचल के छोर को माथे पर लगाना ।
मेरे लिए सँझा को तुलसा पर दीये जलाना ।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
तुम्हारा ख़ुद रूठ जाना फिर मुझको मनाना ।
Monday, January 12, 2009
Sunday, January 4, 2009
aankhen
झुकी - झुकी सी आँखें
चमक भरी प्यारी आँखें
शर्माती भरमाती आँखें
शरारती बतियाती आँखें
रोती और रुलाती आँखें
सहमी सी कतराती आँखें
बिन बोले कितना कुछ
कह जाती बतियारी आँखें
गागर में सागर के जैसे
जीवन दर्शन करवाती आँखें
..............................शुभकामनाओं सहित
.............................................कुहू
चमक भरी प्यारी आँखें
शर्माती भरमाती आँखें
शरारती बतियाती आँखें
रोती और रुलाती आँखें
सहमी सी कतराती आँखें
बिन बोले कितना कुछ
कह जाती बतियारी आँखें
गागर में सागर के जैसे
जीवन दर्शन करवाती आँखें
..............................शुभकामनाओं सहित
.............................................कुहू
aagman
प्रिय,
कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में चुपचाप दबे पाँव चली आती हैं तो कुछ भारी शोर शराबे के साथ।
आने का हल्ला होने से, गुज़र जाने तक संवेदना शायद ही तिल भर को महसूस होती हो पर चुपचाप चले आने वाली चीजों को हम आत्मा तक महसूस करते हैं ।
घटनाये हमेशा कही भी किसी के साथ घटतीहैं अगर याददाश्त के ताने बाने मैं बुन कर दिमाग मैं रख ले जाएँ तो मानव मन के किसी कोने मैं हमेशा के लिए रच बस जाती हैं जितनी प्रभावी घटना होगी उतनी ही देर तक वोः याद रहेगी ................................समय जाते हुए इन पर अपने निशाँ देता जाता है इन्ही निशानों को सहेजने के लिए आज से....................
कुहू
कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में चुपचाप दबे पाँव चली आती हैं तो कुछ भारी शोर शराबे के साथ।
आने का हल्ला होने से, गुज़र जाने तक संवेदना शायद ही तिल भर को महसूस होती हो पर चुपचाप चले आने वाली चीजों को हम आत्मा तक महसूस करते हैं ।
घटनाये हमेशा कही भी किसी के साथ घटतीहैं अगर याददाश्त के ताने बाने मैं बुन कर दिमाग मैं रख ले जाएँ तो मानव मन के किसी कोने मैं हमेशा के लिए रच बस जाती हैं जितनी प्रभावी घटना होगी उतनी ही देर तक वोः याद रहेगी ................................समय जाते हुए इन पर अपने निशाँ देता जाता है इन्ही निशानों को सहेजने के लिए आज से....................
कुहू
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