Friday, September 24, 2010

कुछ यूँ ही हम

कुछ यूँ ही हम
सोचा करते हैं
कुछ कुछ तय किया करते हैं
तिनका तिनका जोड़ा करते हैं
कभी कभी आपकी बातें भी किया करते हैं
अकेले मैं कभी कभी अपने गम भी गलत किया करते हैं
आपसे रूठा करते हैं और फिर खुद को मनाया करते हैं
पर आपके सामने हम हमेशा मुस्कुराया करते हैं
रूठना मनाना और आपकी बातें
हम खुद से ही और सिर्फ खुद से किया करते हैं
और आपको यह लगता हैं कि
हम हमेशा कितना इतराया इठलाया करते हैं
हमारा चुप रहना भी एक अंदाज़ है
यह कहने का कि हम आपको
कितना पसंद किया करते हैं

कुछ यूँ ही हम
अपने गम गलत किया करते हैं
खुद से अकेले बातें किया करते हैं