हम उनके दिल में मेहमानों की तरह रहते हैं
वो आज नही , अभी नही ,
कल चले जाना कहते हैं
यह कहते कहते रात गुज़र जाती है
और बात आई गई हो जाती है
इस आने जाने की तकरार में
रूठने मनाने के खुमार में
हम हमेशा भूल जाते हैं कि,
हम इस घर में मेहमान हैं
पता नही कब तक ये
अपना मुकाम है
पता नही कबतक
शायद आज या अभी तक
जाने कब तक
हम यहाँ मेहमान हैं
