Tuesday, October 26, 2010

जब हम साथ हैं ...................

जब साथ होते हैं तो धूप छांह है
जब हम साथ नहीं तो , बारिश भी बेकार है
जब हम पास हैं धड़कन सरपट भागती है
घडी की सुई थम जाती है मैं उड़ने लगती हूँ
समां थम सा जाता है लू ठंडी लगती है
बोझा हल्का हो जाता है सूरज चाँद हो जाता है
ख्याल सच से लगते हैं ग़म छूमंतर हो जाते हैं
जब हम साथ होते हैं तो धूप छांह हो जाती है

Wednesday, October 20, 2010

जो मैंने कहा ???

तुमसे , मुझ से और हम से
बातें होती हैं हम सबसे l
जब - जब होता है तुम्हारा कहना
मुझे रहता है हमेशा गुनना l
पर जब बातें होती हैं हम दोनों में
तो वो आनी जानी हो जाती हैं l
गर मैं बोलूं कभी
तो तुम्हारा होता है यह कहना ,
लड़की हो लड़की ही रहना l
लड़का मत बनते रहना ll
जो मेरा होता है यह कहना ,
चाहे लड़की हो या लड़का ,
काम अच्छे ही करते रहना l
बातें भली ही करना ll
तुम्हारा होता फिर यह कहना ,
हमें है ज़माने में ही रहना ,
और तुम्हे हमेशा से है लड़की ही रहना ,
तो बनालो चुप्पी को अपना गहना ,
वर्ना तुम्हे पड़ेगा सबके फिकरे
सारी उम्र सहना .......................

Friday, October 1, 2010

शुन्य और एक नीम हकीम

उसने अपनी जान ले ली
शुन्य को जानने के बाद
शुन्य को जानने के बाद शायद उसे लगा हो
कि यह दुनिया ही शुन्य है
या फिर उसे लगा हो कि
अब कुछ भी जानना उसके लिए बाकी नहीं रहा
शुन्य की तरह
या जीवन उसका
शुन्य की तरह निरर्थक बन गया हो
पर भाई शुन्य का भी मतलब होता है
जब एक के सामने लगा दो तो वह दस बन जाना है
पर थोथी मानसिकता का बिंदु यानि दशमलव गर लग जाए तो
उसके बाद आप जितने चाहे शुन्य लगते रहे मूल्य में कोई अंतर नहीं आता
गर वह समझ जाता
तो शुन्य के होने का अर्थ उसकी समझ आता
पर नादान "नीम हकीम खतरे में डाली खुद की जान "
इन सबसे बढ़कर शुन्य हैं महान जो अपने होने की
व्याख्या खुद करता है ........ बिना किसी लाग लपेट के
और साथ ही साथ दूसरो की मदद भी करता है
एक को दस और दस को सौ करने में ...........

Friday, September 24, 2010

कुछ यूँ ही हम

कुछ यूँ ही हम
सोचा करते हैं
कुछ कुछ तय किया करते हैं
तिनका तिनका जोड़ा करते हैं
कभी कभी आपकी बातें भी किया करते हैं
अकेले मैं कभी कभी अपने गम भी गलत किया करते हैं
आपसे रूठा करते हैं और फिर खुद को मनाया करते हैं
पर आपके सामने हम हमेशा मुस्कुराया करते हैं
रूठना मनाना और आपकी बातें
हम खुद से ही और सिर्फ खुद से किया करते हैं
और आपको यह लगता हैं कि
हम हमेशा कितना इतराया इठलाया करते हैं
हमारा चुप रहना भी एक अंदाज़ है
यह कहने का कि हम आपको
कितना पसंद किया करते हैं

कुछ यूँ ही हम
अपने गम गलत किया करते हैं
खुद से अकेले बातें किया करते हैं