Friday, October 1, 2010

शुन्य और एक नीम हकीम

उसने अपनी जान ले ली
शुन्य को जानने के बाद
शुन्य को जानने के बाद शायद उसे लगा हो
कि यह दुनिया ही शुन्य है
या फिर उसे लगा हो कि
अब कुछ भी जानना उसके लिए बाकी नहीं रहा
शुन्य की तरह
या जीवन उसका
शुन्य की तरह निरर्थक बन गया हो
पर भाई शुन्य का भी मतलब होता है
जब एक के सामने लगा दो तो वह दस बन जाना है
पर थोथी मानसिकता का बिंदु यानि दशमलव गर लग जाए तो
उसके बाद आप जितने चाहे शुन्य लगते रहे मूल्य में कोई अंतर नहीं आता
गर वह समझ जाता
तो शुन्य के होने का अर्थ उसकी समझ आता
पर नादान "नीम हकीम खतरे में डाली खुद की जान "
इन सबसे बढ़कर शुन्य हैं महान जो अपने होने की
व्याख्या खुद करता है ........ बिना किसी लाग लपेट के
और साथ ही साथ दूसरो की मदद भी करता है
एक को दस और दस को सौ करने में ...........

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