आज कल मौसम के मिजाज़ कुछ और ही हो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए

गुम गई हैं बारिश की नर्म बूदें इन फिजाओं में कुछ यूँ के
जैसे हमारे नसीब कुछ और ही हो गए
आते जाते पूछा उनसे.......के क्या हाल हैं आपके ?
हँसते हुए कहा उन्होंने .........हम राह चलते चलते कही और खो गए................
आज कल मौसम के मिजाज़ कुछ और ही हो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए
