हम उनके दिल में मेहमानों की तरह रहते हैं
वो आज नही , अभी नही ,
कल चले जाना कहते हैं
यह कहते कहते रात गुज़र जाती है
और बात आई गई हो जाती है
इस आने जाने की तकरार में
रूठने मनाने के खुमार में
हम हमेशा भूल जाते हैं कि,
हम इस घर में मेहमान हैं
पता नही कब तक ये
अपना मुकाम है
पता नही कबतक
शायद आज या अभी तक
जाने कब तक
हम यहाँ मेहमान हैं
Friday, October 2, 2009
Friday, September 4, 2009
Hurt but not down
How things turn
Dark from bright
Why people transpire
Foe from friend
Nobody knows ……………………..
It takes a bit of white lie
Told in superficial tenor
The back stabbing,
Fills the heart
With guilt n remorse
One feels like
Getting rid of people, places n the course
But I spot silver lining at the edge of dark cloud
It is a lifetime lesson
Which I would have never learnt
Without you dear foe
I would have never known
How strong I can be………….
To learn from pain
To make out from loss
To turn dark to bright
To smile genuinely, when in pain
I m more positive then was ever been
So nobody can hurt me
Again like this
I have found soul mate of mine
In myself who will be with me
Never to betray but
To strengthen thought of truth
Make me stronger and confident,
To face all ups n downs
Rights or wrongs
With ease
I owe my thanks to you
Dear foe
For making me
Superior systematic n solid
Dark from bright
Why people transpire
Foe from friend
Nobody knows ……………………..
It takes a bit of white lie
Told in superficial tenor
The back stabbing,
Fills the heart
With guilt n remorse
One feels like
Getting rid of people, places n the course
But I spot silver lining at the edge of dark cloud
It is a lifetime lesson
Which I would have never learnt
Without you dear foe
I would have never known
How strong I can be………….
To learn from pain
To make out from loss
To turn dark to bright
To smile genuinely, when in pain
I m more positive then was ever been
So nobody can hurt me
Again like this
I have found soul mate of mine
In myself who will be with me
Never to betray but
To strengthen thought of truth
Make me stronger and confident,
To face all ups n downs
Rights or wrongs
With ease
I owe my thanks to you
Dear foe
For making me
Superior systematic n solid
Thursday, August 6, 2009
मौसम के मिजाज़
आज कल मौसम के मिजाज़ कुछ और ही हो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए

गुम गई हैं बारिश की नर्म बूदें इन फिजाओं में कुछ यूँ के
जैसे हमारे नसीब कुछ और ही हो गए
आते जाते पूछा उनसे.......के क्या हाल हैं आपके ?
हँसते हुए कहा उन्होंने .........हम राह चलते चलते कही और खो गए................
आज कल मौसम के मिजाज़ कुछ और ही हो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए
जैसे हमारे दोस्त हमारी ठौर ही खो गए
Sunday, February 1, 2009
बुजुर्ग झील
यह बड़ा ताल हैं बहुत पुराना
इसने ख़ुद में संजोया है,
बरसों पुराना समय का खजाना,
अनुभवों की कहानियाँ,
पीढियों का ताना बाना ।
और देता आया हैं हमें पीढी दरपीढी
मीठे पानी , सुखद हवा, दरख्तों का नजराना ।
पर अब के बरस बारिश की खुराक नहीं आई ।
सो लोगों को आसरा देने वाला,
ख़ुद उनके आसरे हो गया ।
आस पास नज़रें उठा कर देखा ,
तो बड़ी हैरानी हुई
सोचे सोचते शाम ढल गई ।
जाने कितने ताल-पोखर-बावडी ,
तिल-तिल कर मरते नज़र आए ।
पानी के सोतों का क्या कहें ,
जिंदगी के अनुभवों से लबरेज़ - बुजुर्गवार के लटके चेहरे,
जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहे
जेहन में तैरते चले आए
...............................................................................
१
सुबह -शाम वक्त के साथ चलने की फिराक में
आगे और आगे बढ़ने के जूनून में
उनको समझना छोड़ दिया हमने
जिन्होंने हमे समझने के लिए
ख़ुद को समझना कब का छोड़ दिया हैं
..............................................................
२
सोचो बरस दो बरस
पानी की खुराक न मिलने पर
जब बड़े ताल को लोगों की ज़रूरत है
तो यहाँ बरसो बरस
स्नेह की बारिश न होने पर धरती तो बंजर हो चली होगी ।
............................................................................................
३
आओ तालों की मानिंद
इस तेज़ रफ्तार जिंदगी से
हर दिन, एक लम्हा, एक घंटा, एक पहर चुरा ले
हफ्ता दर हफ्ता, महीना दर महीना
कुछ पलों का विराम लेकर
बुजुर्गों के चेहरे रोशन किए जाएँ
ताकि कभी कहीं कोई बेहाल न हो जाए
और उसका हाल बड़े ताल सा न हो जाए
- कुहू
इसने ख़ुद में संजोया है,
बरसों पुराना समय का खजाना,
अनुभवों की कहानियाँ,
पीढियों का ताना बाना ।
और देता आया हैं हमें पीढी दरपीढी
मीठे पानी , सुखद हवा, दरख्तों का नजराना ।
पर अब के बरस बारिश की खुराक नहीं आई ।
सो लोगों को आसरा देने वाला,
ख़ुद उनके आसरे हो गया ।
आस पास नज़रें उठा कर देखा ,
तो बड़ी हैरानी हुई
सोचे सोचते शाम ढल गई ।
जाने कितने ताल-पोखर-बावडी ,
तिल-तिल कर मरते नज़र आए ।
पानी के सोतों का क्या कहें ,
जिंदगी के अनुभवों से लबरेज़ - बुजुर्गवार के लटके चेहरे,
जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहे
जेहन में तैरते चले आए
...............................................................................
१
सुबह -शाम वक्त के साथ चलने की फिराक में
आगे और आगे बढ़ने के जूनून में
उनको समझना छोड़ दिया हमने
जिन्होंने हमे समझने के लिए
ख़ुद को समझना कब का छोड़ दिया हैं
..............................................................
२
सोचो बरस दो बरस
पानी की खुराक न मिलने पर
जब बड़े ताल को लोगों की ज़रूरत है
तो यहाँ बरसो बरस
स्नेह की बारिश न होने पर धरती तो बंजर हो चली होगी ।
............................................................................................
३
आओ तालों की मानिंद
इस तेज़ रफ्तार जिंदगी से
हर दिन, एक लम्हा, एक घंटा, एक पहर चुरा ले
हफ्ता दर हफ्ता, महीना दर महीना
कुछ पलों का विराम लेकर
बुजुर्गों के चेहरे रोशन किए जाएँ
ताकि कभी कहीं कोई बेहाल न हो जाए
और उसका हाल बड़े ताल सा न हो जाए
- कुहू
Monday, January 12, 2009
Maaa
तुम्हारा ख़ुद रूठ जाना औरफिर मुझको मनाना ,
खिलखिला कर हँसना, फिर चुपके से मुस्कुराना
जब मैं रूठ जाऊं तो .............मनाना, मनाना, मनाते ही जाना ।
वोह हौले से आना......... ..और आकर दीवार पर टिक जाना।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
वो धीरे से पीठ पर धौल ज़माना ।
पकाते पकाते भजन गुनगुनाना ।
तुम्हारा वो सँझा में तुलसा पर दीये जलाना।
वो बाहर से हँसना भीतर से रोना ।
मेरे लिए दूसरों के ताने सहना ।
कुछ पूछने पर चुपके से मुस्कुराना ।
आँचल के छोर को माथे पर लगाना ।
मेरे लिए सँझा को तुलसा पर दीये जलाना ।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
तुम्हारा ख़ुद रूठ जाना फिर मुझको मनाना ।
खिलखिला कर हँसना, फिर चुपके से मुस्कुराना
जब मैं रूठ जाऊं तो .............मनाना, मनाना, मनाते ही जाना ।
वोह हौले से आना......... ..और आकर दीवार पर टिक जाना।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
वो धीरे से पीठ पर धौल ज़माना ।
पकाते पकाते भजन गुनगुनाना ।
तुम्हारा वो सँझा में तुलसा पर दीये जलाना।
वो बाहर से हँसना भीतर से रोना ।
मेरे लिए दूसरों के ताने सहना ।
कुछ पूछने पर चुपके से मुस्कुराना ।
आँचल के छोर को माथे पर लगाना ।
मेरे लिए सँझा को तुलसा पर दीये जलाना ।
वो बहना, वो गहना , वो बातें बनाना ।
तुम्हारा ख़ुद रूठ जाना फिर मुझको मनाना ।
Sunday, January 4, 2009
aankhen
झुकी - झुकी सी आँखें
चमक भरी प्यारी आँखें
शर्माती भरमाती आँखें
शरारती बतियाती आँखें
रोती और रुलाती आँखें
सहमी सी कतराती आँखें
बिन बोले कितना कुछ
कह जाती बतियारी आँखें
गागर में सागर के जैसे
जीवन दर्शन करवाती आँखें
..............................शुभकामनाओं सहित
.............................................कुहू
चमक भरी प्यारी आँखें
शर्माती भरमाती आँखें
शरारती बतियाती आँखें
रोती और रुलाती आँखें
सहमी सी कतराती आँखें
बिन बोले कितना कुछ
कह जाती बतियारी आँखें
गागर में सागर के जैसे
जीवन दर्शन करवाती आँखें
..............................शुभकामनाओं सहित
.............................................कुहू
aagman
प्रिय,
कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में चुपचाप दबे पाँव चली आती हैं तो कुछ भारी शोर शराबे के साथ।
आने का हल्ला होने से, गुज़र जाने तक संवेदना शायद ही तिल भर को महसूस होती हो पर चुपचाप चले आने वाली चीजों को हम आत्मा तक महसूस करते हैं ।
घटनाये हमेशा कही भी किसी के साथ घटतीहैं अगर याददाश्त के ताने बाने मैं बुन कर दिमाग मैं रख ले जाएँ तो मानव मन के किसी कोने मैं हमेशा के लिए रच बस जाती हैं जितनी प्रभावी घटना होगी उतनी ही देर तक वोः याद रहेगी ................................समय जाते हुए इन पर अपने निशाँ देता जाता है इन्ही निशानों को सहेजने के लिए आज से....................
कुहू
कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में चुपचाप दबे पाँव चली आती हैं तो कुछ भारी शोर शराबे के साथ।
आने का हल्ला होने से, गुज़र जाने तक संवेदना शायद ही तिल भर को महसूस होती हो पर चुपचाप चले आने वाली चीजों को हम आत्मा तक महसूस करते हैं ।
घटनाये हमेशा कही भी किसी के साथ घटतीहैं अगर याददाश्त के ताने बाने मैं बुन कर दिमाग मैं रख ले जाएँ तो मानव मन के किसी कोने मैं हमेशा के लिए रच बस जाती हैं जितनी प्रभावी घटना होगी उतनी ही देर तक वोः याद रहेगी ................................समय जाते हुए इन पर अपने निशाँ देता जाता है इन्ही निशानों को सहेजने के लिए आज से....................
कुहू
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