Friday, October 2, 2009

मेहमान

हम उनके दिल में मेहमानों की तरह रहते हैं
वो आज नही , अभी नही ,
कल चले जाना कहते हैं
यह कहते कहते रात गुज़र जाती है
और बात आई गई हो जाती है
इस आने जाने की तकरार में
रूठने मनाने के खुमार में
हम हमेशा भूल जाते हैं कि,
हम इस घर में मेहमान हैं
पता नही कब तक ये
अपना मुकाम है
पता नही कबतक
शायद आज या अभी तक
जाने कब तक
हम यहाँ मेहमान हैं

6 comments:

  1. We have to remember all the things we attempt to forget.

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  2. mam, really,simplec n awesomes......
    bada mast likhte ho.

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  3. पता नही कबतक
    शायद आज या अभी तक
    जाने कब तक
    हम यहाँ मेहमान हैं
    .... prabhaavashaali rachanaa !!!

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  4. we have to remember every moment then only you will think that who you are? for what reason you came on earth

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