यह बड़ा ताल हैं बहुत पुराना
इसने ख़ुद में संजोया है,
बरसों पुराना समय का खजाना,
अनुभवों की कहानियाँ,
पीढियों का ताना बाना ।
और देता आया हैं हमें पीढी दरपीढी
मीठे पानी , सुखद हवा, दरख्तों का नजराना ।
पर अब के बरस बारिश की खुराक नहीं आई ।
सो लोगों को आसरा देने वाला,
ख़ुद उनके आसरे हो गया ।
आस पास नज़रें उठा कर देखा ,
तो बड़ी हैरानी हुई
सोचे सोचते शाम ढल गई ।
जाने कितने ताल-पोखर-बावडी ,
तिल-तिल कर मरते नज़र आए ।
पानी के सोतों का क्या कहें ,
जिंदगी के अनुभवों से लबरेज़ - बुजुर्गवार के लटके चेहरे,
जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहे
जेहन में तैरते चले आए
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१
सुबह -शाम वक्त के साथ चलने की फिराक में
आगे और आगे बढ़ने के जूनून में
उनको समझना छोड़ दिया हमने
जिन्होंने हमे समझने के लिए
ख़ुद को समझना कब का छोड़ दिया हैं
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२
सोचो बरस दो बरस
पानी की खुराक न मिलने पर
जब बड़े ताल को लोगों की ज़रूरत है
तो यहाँ बरसो बरस
स्नेह की बारिश न होने पर धरती तो बंजर हो चली होगी ।
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३
आओ तालों की मानिंद
इस तेज़ रफ्तार जिंदगी से
हर दिन, एक लम्हा, एक घंटा, एक पहर चुरा ले
हफ्ता दर हफ्ता, महीना दर महीना
कुछ पलों का विराम लेकर
बुजुर्गों के चेहरे रोशन किए जाएँ
ताकि कभी कहीं कोई बेहाल न हो जाए
और उसका हाल बड़े ताल सा न हो जाए
- कुहू

Very meaningful lines Kuhu..
ReplyDeleteDont hav enough words for appreciation nor i m capable of to do so..
only thing i can say i feel proud over ya..
sundar rachna mam..
ReplyDeleteपर अब के बरस बारिश की खुराक नहीं आई।
सो लोगों को आसरा देने वाला,
ख़ुद उनके आसरे हो गया।
sundar lines
jhil ki vyatha ko apne shabdon ke madhyam se bahut achhhe se piroya hai..
Sundar..
Rakhi aapaki kavitaay achhi hai
ReplyDelete'ताकि कभी कहीं कोई बेहाल न हो जाए
और उसका हाल बड़े ताल सा न हो जाए'
Achhi baat ...
achhi kavitayeN....
ReplyDeleteसुबह -शाम वक्त के साथ चलने की फिराक में
ReplyDeleteआगे और आगे बढ़ने के जूनून में
उनको समझना छोड़ दिया हमने
जिन्होंने हमे समझने के लिए
ख़ुद को समझना कब का छोड़ दिया हैं
Bahut si sundar panktiyan hain...mam
Aapne Bhopal ki jeevan rekha ki vyatha ko bahut hi sundar dhang se likha hai...main aapki rachnadharmita ka kaayal hoon...
kabhi mere blog par bhi aayiye...welcome
Hat of you
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