हमसाया
तुझ में , मुझमें,
है मीलो का अंतर।
पर तू मुझमें,
और में तेरे भीतर।
तुझसे मैं हूँ ,
और मुझसे तू ,
पर फिर भी हम ,
है जुदा जुदा यूँ।
फिर भी साथ साथ यूँ ,
जाऊं मैं जहाँ भी
बस तू ही तू,
है हर कहीं।
फिर मिलता नहीं है चैन
मुझे क्यूँ कहीं भी ?
चाहे भाग कर ,
छुप जाऊं ,
दूर जाकर तुझसे कहीं।
पर ढूँढ लेता है तू ,
मुझे हर कहीं।
एक हलकी से मुस्कान से ,
जान ले लेता है फिर मेरी।
देह, दिखावे, दुनिया से परे
मुझको मुझमें मिलता हर घड़ी।
तुझ में , मुझमें,
है मीलो का अंतर।
पर तू मुझमें,
और में तेरे भीतर।
तुझसे मैं हूँ ,
और मुझसे तू ,
पर फिर भी हम ,
है जुदा जुदा यूँ।
फिर भी साथ साथ यूँ ,
जाऊं मैं जहाँ भी
बस तू ही तू,
है हर कहीं।
फिर मिलता नहीं है चैन
मुझे क्यूँ कहीं भी ?
चाहे भाग कर ,
छुप जाऊं ,
दूर जाकर तुझसे कहीं।
पर ढूँढ लेता है तू ,
मुझे हर कहीं।
एक हलकी से मुस्कान से ,
जान ले लेता है फिर मेरी।
देह, दिखावे, दुनिया से परे
मुझको मुझमें मिलता हर घड़ी।

Very nice 👏
ReplyDeleteMarvellous
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