Tuesday, October 26, 2010

जब हम साथ हैं ...................

जब साथ होते हैं तो धूप छांह है
जब हम साथ नहीं तो , बारिश भी बेकार है
जब हम पास हैं धड़कन सरपट भागती है
घडी की सुई थम जाती है मैं उड़ने लगती हूँ
समां थम सा जाता है लू ठंडी लगती है
बोझा हल्का हो जाता है सूरज चाँद हो जाता है
ख्याल सच से लगते हैं ग़म छूमंतर हो जाते हैं
जब हम साथ होते हैं तो धूप छांह हो जाती है

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