Wednesday, June 28, 2023

मिठास


तुम्हारे गालों पर पड़ने वाले,

गड्ढ़ों से भी गहरी l 

और, 

तुम्हारी मोहक - नट्खट 

मुस्कान से भी प्यारी ll 

तुम्हारी 

दो बोलती हुई आँखें,

कितना कुछ बोलकर भी,

निःशब्द कर देती हैं तुम्हें  ll 

कि तुम कब,

अपनी चुप्पी तोड़ो l 

और, मैं कब 

 अपनी झिझक ll 

मुकाबला गज़ब 

का है l 

ना तुम कम हो,

ना हम कम हैं ll 

 

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