मिठास
तुम्हारे गालों पर पड़ने वाले,
गड्ढ़ों से भी गहरी l
और,
तुम्हारी मोहक - नट्खट
मुस्कान से भी प्यारी ll
तुम्हारी
दो बोलती हुई आँखें,
कितना कुछ बोलकर भी,
निःशब्द कर देती हैं तुम्हें ll
कि तुम कब,
अपनी चुप्पी तोड़ो l
और, मैं कब
अपनी झिझक ll
मुकाबला गज़ब
का है l
ना तुम कम हो,
ना हम कम हैं ll

Great expression
ReplyDeleteDhanyavad
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